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लेबनान युद्ध के बीच ईरान ने बंद किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मार्ग

मुस्लिम नाउ ब्यूरो, तेहरान

मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है. लेबनान में इजरायल के लगातार बढ़ते हमलों से नाराज होकर ईरान ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है. ईरान ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को पूरी तरह बंद कर दिया है. ईरान के इस फैसले से वैश्विक तेल बाजार और दुनिया भर की अर्थव्यवस्था में भारी उथल-पुथल मचने की आशंका पैदा हो गई है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच बेहद संवेदनशील शांति वार्ता शुरू होने वाली है.

Maritime traffic with oil tankers in the Strait of Hormuz

स्विट्जरलैंड वार्ता से ठीक पहले ईरान का बड़ा झटका

ईरान के सैन्य कमांड ने सरकारी टेलीविजन पर सीधे तौर पर ऐलान किया है कि जलमार्ग को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया गया है. तेहरान ने इसके लिए इजरायल के लगातार जारी हमलों और अमेरिका की वादाखिलाफी को जिम्मेदार ठहराया है. ईरान का कहना है कि अमेरिका ने अंतरिम समझौते के नियमों का ठीक से पालन नहीं किया है. वह लेबनान में जारी जंग को रुकवाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है.

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाही ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि ईरान के राजनयिक स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक पहुंच तो रहे हैं लेकिन वहां कोई बड़ा नतीजा निकलने की उम्मीद बेहद कम है. तेहरान तभी किसी अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर करेगा जब अमेरिका और उसके सहयोगी देश अपनी पुरानी प्रतिबद्धताओं को पूरी तरह जमीन पर लागू करके दिखाएंगे. अगर ऐसा नहीं होता है तो पुराना समझौता भी पूरी तरह रद्द समझा जाएगा.

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लेबनान में इजरायली बमबारी से मची भारी तबाही

इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ लेबनान में रुक-रुक कर हो रहे भीषण हवाई हमले हैं. शनिवार को ही इजरायली लड़ाकू विमानों ने दक्षिणी लेबनान के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया है. इस ताजा बमबारी में कम से कम 16 बेकसूर नागरिकों की मौत हो गई है. मरने वालों में दो मासूम बच्चे भी शामिल हैं. लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के अनुसार नबातीह शहर और उसके आसपास के गांवों में भारी तबाही मची है. कई रिहायशी इमारतें मलबे में तब्दील हो गई हैं. राहत और बचाव दल मलबे में दबे जीवित लोगों को बाहर निकालने की लगातार कोशिश कर रहे हैं.

pic: social media

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बेहद डराने वाला आंकड़ा जारी किया है. इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच जारी इस ताजा युद्ध में अब तक मरने वालों की कुल संख्या 4000 के पार जा चुकी है. संघर्ष को रोकने के लिए कतर और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देश लगातार कोशिशें कर रहे हैं. लेकिन जमीनी हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं.

युद्ध विराम के दावों के बीच हिजबुल्लाह का पलटवार

कुछ ही घंटों पहले दोनों पक्षों के बीच एक अस्थायी युद्ध विराम पर सहमति बनने की खबरें आई थीं. लेकिन शुक्रवार की रात को हुई भारी गोलाबारी ने उन सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. शुक्रवार को हुए हमलों में लेबनान के 47 नागरिकों और इजरायल के 4 सैनिकों की जान चली गई थी.

इसके बाद शनिवार को हिजबुल्लाह ने भी इजरायली ठिकानों पर बड़ा जवाबी हमला किया है. इजरायली सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हिजबुल्लाह ने रात भर में उनके ठिकानों की तरफ 50 से ज्यादा रॉकेट और ड्रोन दागे हैं. इसके जवाब में इजरायली वायुसेना ने भी दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के कमांड सेंटरों पर दर्जनों बम गिराए हैं.

संघर्ष से जुड़े मुख्य आंकड़ेस्थिति की गंभीरता
कुल मौतें (लेबनान)4,000 से अधिक नागरिक और लड़ाके
शनिवार के हमले में मौतें16 लोग (2 बच्चों सहित)
हिजबुल्लाह के जवाबी रॉकेट50 से अधिक मिसाइलें और ड्रोन
इजरायली सैन्य कार्रवाई150 से अधिक हिजबुल्लाह ठिकानों पर हमला

क्या संकट में पड़ जाएगा अमेरिका और ईरान का समझौता?

इस साल 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर सीधे हमले किए थे, तब हिजबुल्लाह ने भी उत्तरी इजरायल पर ताबड़तोड़ रॉकेट दागकर युद्ध की शुरुआत कर दी थी. जवाब में इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के एक बहुत बड़े हिस्से पर अपना कब्जा जमा लिया था. उस समय भी ईरान ने इस समुद्री रास्ते को बंद कर दिया था. जिससे पूरी दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई रुक गई थी.

हाल ही में हुए अमेरिका-ईरान अंतरिम समझौते के बाद ही इस समुद्री रास्ते को दोबारा जहाजों के लिए खोला गया था. लेकिन अब यह समझौता फिर से खटाई में पड़ता दिख रहा है. सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इस शांति समझौते पर न तो इजरायल ने हस्ताक्षर किए हैं और न ही हिजबुल्लाह ने.

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी सीमाओं पर खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक उनकी सेना दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगी. दूसरी तरफ हिजबुल्लाह का कहना है कि जब तक इजरायल लेबनान की धरती खाली नहीं करता, वे अपने हमले नहीं रोकेंगे.

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया मंदी का खतरा

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना पूरी दुनिया के लिए एक बेहद बुरी खबर है. खाड़ी देशों से निकलने वाला अधिकांश कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर एशिया, यूरोप और अमेरिका के बाजारों तक पहुंचता है. इसके बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की पूरी आशंका है.

वाशिंगटन में भी इस बात को लेकर हलचल तेज हो गई है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पुष्टि की है कि उनके शीर्ष वार्ताकार जेरेड कुश्नर और स्टीव विटकॉफ पहले से ही स्विट्जरलैंड में मौजूद हैं. वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम और इस नए संकट को सुलझाने के लिए तकनीकी बारीकियों पर लगातार काम कर रहे हैं. जेडी वेंस खुद भी अगले दो दिनों के भीतर स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हो सकते हैं. अगले हफ्ते वाशिंगटन में लेबनान सरकार और इजरायल के बीच एक नई वार्ता आयोजित होने की उम्मीद है. लेकिन जब तक जमीनी स्तर पर बमबारी नहीं रुकती, तब तक किसी भी समझौते का टिक पाना नामुमकिन नजर आता है.