दुनिया भर में दिखेगा जिलहिज्जा का चांद, ईद उल अजहा की तैयारी तेज
मुस्लिम नाउ ब्यूरो,,दुबई।
दुनिया भर के मुस्लिम देशों में रविवार शाम जिलहिज्जा का चांद देखने की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी चांद के दिखने के साथ इस्लामी कैलेंडर के आखिरी महीने जिलहिज्जा की शुरुआत होगी। यही वह महीना है जिसमें हज अदा किया जाता है और ईद उल अजहा मनाई जाती है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, तुर्किये, ट्यूनीशिया समेत कई देशों ने आधिकारिक तौर पर चांद देखने की अपील की है। कई देशों में खगोलीय गणनाओं और आधुनिक तकनीकों की मदद भी ली जा रही है।
रविवार को दुनिया के अलग अलग हिस्सों में चांद देखने के लिए विशेष समितियां सक्रिय रहीं। खाड़ी देशों के वेधशालाओं में आधुनिक कैमरे और डिजिटल उपकरण लगाए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि एशिया, अफ्रीका और यूरोप के कई हिस्सों में मौसम साफ रहने पर चांद दिखने की संभावना है।
संयुक्त अरब अमीरात में फतवा परिषद ने घोषणा की कि रविवार शाम जिलहिज्जा का चांद देखने की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर की जाएगी। इसके लिए राष्ट्रीय वेधशालाओं और खगोल विज्ञान केंद्रों को शामिल किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक पारंपरिक तरीके के साथ आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल होगा ताकि सही और प्रमाणिक जानकारी सामने आ सके।
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अबू धाबी के अल खातिम खगोलीय वेधशाला ने रविवार सुबह जिलहिज्जा के नए चांद की पहली तस्वीर लेने का दावा किया। अंतरराष्ट्रीय खगोल विज्ञान केंद्र से जुड़े इस वेधशाला ने बताया कि सुबह करीब नौ बजकर बीस मिनट पर दिन की रोशनी में चांद की तस्वीर ली गई। खगोलविद मोहम्मद शौकत औदेह और उनकी टीम ने यह तस्वीर रिकॉर्ड की।

विशेषज्ञों के अनुसार उस समय चांद सूर्य से करीब 7.8 डिग्री दूर था और उसकी आयु लगभग नौ घंटे थी। हालांकि अंतिम फैसला आधिकारिक चांद देखने वाली समितियों के ऐलान के बाद ही माना जाएगा।
तुर्किये ने पहले ही घोषणा कर दी है कि सोमवार 18 मई से जिलहिज्जा की शुरुआत होगी। वहां ईद उल अजहा 27 मई को मनाई जाएगी। तुर्किये लंबे समय से खगोलीय गणनाओं के आधार पर इस्लामी कैलेंडर तय करता है और वहां प्रत्यक्ष चांद देखने की परंपरा कम है।
ट्यूनीशिया भी उन शुरुआती देशों में शामिल रहा जिसने जिलहिज्जा की तारीख का ऐलान किया। वहां भी सोमवार को महीने का पहला दिन घोषित किया गया है। इसके बाद कई अन्य देशों से भी आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार किया जा रहा है।
सऊदी अरब के सुप्रीम कोर्ट ने लोगों से अपील की है कि वे रविवार शाम चांद देखने की कोशिश करें और यदि चांद दिखाई दे तो संबंधित समितियों को जानकारी दें। सऊदी अरब में जिलहिज्जा का चांद दिखना पूरी मुस्लिम दुनिया के लिए अहम माना जाता है क्योंकि हज और अरफा का दिन उसी के अनुसार तय होता है।
ओमान की चांद देखने वाली सर्वोच्च समिति भी रविवार शाम बैठक करेगी। वहां प्रशासन ने नागरिकों और स्थानीय समितियों से सहयोग मांगा है। कई इस्लामी देशों में चांद देखने की प्रक्रिया धार्मिक परंपरा के साथ सामाजिक महत्व भी रखती है।
इस बीच यूएई में ईद उल अजहा की छुट्टियों को लेकर भी उत्साह बढ़ गया है। वहां सरकारी कर्मचारियों के लिए पांच दिन की छुट्टी घोषित की गई है। 25 मई से 29 मई तक सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे जबकि कामकाज एक जून से फिर शुरू होगा।
स्कूलों में भी लंबी छुट्टियों की घोषणा की गई है। यूएई के शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि ईद और मध्यावधि अवकाश एक साथ होने के कारण छात्रों और शिक्षकों को नौ दिन तक का ब्रेक मिलेगा। दुबई और शारजाह के निजी स्कूलों ने भी इसी कार्यक्रम के अनुसार छुट्टियों का ऐलान किया है।
शारजाह में कुछ छात्रों को सप्ताहांत मिलाकर करीब दस दिन की छुट्टी मिलने की संभावना है। इससे पहले से ही बाजारों और पर्यटन स्थलों पर रौनक बढ़ने लगी है। परिवार ईद की खरीदारी और यात्रा योजनाओं में जुट गए हैं।
ईद उल अजहा इस्लाम के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में माना जाता है। इसे कुर्बानी का त्योहार कहा जाता है। यह त्योहार हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की उस महान कुर्बानी की याद दिलाता है जब उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर अपने बेटे हजरत इस्माईल अलैहिस्सलाम को कुर्बान करने की तैयारी कर ली थी।
عاجل: أول صورة لهلال شهر "ذو الحجة"
— مركز الفلك الدولي (@AstronomyCenter) May 17, 2026
هلال شهر “ذو الحجة” 1447هـ كما تم تصويره نهارا من أبوظبي، بواسطة مرصد الختم الفلكي التابع لمركز الفلك الدولي، وقت التصوير الأحد 17 مايو 2026م الساعة 09:20 بتوقيت الإمارات. بعد القمر عن الشمس 7.8 درجة. عمر القمر 9 ساعات.
تصوير: محمد عودة. فريق… pic.twitter.com/tXwndv8WD2
इस्लामी मान्यता के अनुसार जब हजरत इब्राहीम अपने बेटे की कुर्बानी देने वाले थे तब अल्लाह ने उनकी परीक्षा पूरी होने पर एक दुम्बा भेज दिया और हजरत इस्माईल की जान बच गई। उसी घटना की याद में मुसलमान ईद उल अजहा पर जानवर की कुर्बानी करते हैं।
ईद उल अजहा का सबसे अहम हिस्सा कुर्बानी माना जाता है। मुसलमान अपनी क्षमता के अनुसार बकरा, भेड़, गाय या ऊंट की कुर्बानी करते हैं। कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। एक हिस्सा अपने परिवार के लिए रखा जाता है। दूसरा रिश्तेदारों और दोस्तों को दिया जाता है। तीसरा हिस्सा गरीब और जरूरतमंद लोगों में बांटा जाता है।
هلال آخر الشهر (لشهر ذو القعدة 1447هـ) كما تم تصويره نهارا قبل قليل من أبوظبي، بواسطة مرصد الختم الفلكي التابع لمركز الفلك الدولي، وقت التصوير السبت 16 مايو 2026م الساعة عصرا بتوقيت الإمارات. بعد القمر عن الشمس 7.5 درجة. عمر القمر سالب 8 ساعات و32 دقيقة.
— مركز الفلك الدولي (@AstronomyCenter) May 16, 2026
تصوير: محمد عودة. فريق… pic.twitter.com/tyRDAXp85o
इस पर्व का संदेश केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। यह त्याग, इंसानियत और जरूरतमंदों की मदद का भी प्रतीक है। इसी कारण दुनिया भर में मुसलमान इस दिन दान और सामाजिक सहयोग पर विशेष ध्यान देते हैं।

ईद उल अजहा से पहले आने वाला अरफा का दिन भी इस्लाम में बेहद अहम माना जाता है। यह जिलहिज्जा की नौ तारीख को होता है। इसी दिन हज यात्री मक्का के मैदान ए अरफा में इकट्ठा होते हैं और विशेष इबादत करते हैं। इस्लामी परंपरा में कहा गया है कि अरफा के बिना हज पूरा नहीं होता।
जो लोग हज पर नहीं जाते वे भी अरफा के दिन रोजा रखते हैं। माना जाता है कि इस दिन रोजा रखने से पिछले और अगले साल के गुनाह माफ हो जाते हैं। यही वजह है कि दुनिया भर के मुसलमान इस दिन विशेष इबादत, दुआ और कुरान की तिलावत करते हैं।
इस साल भी हज की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। सऊदी अरब के हज और उमरा मंत्रालय ने नए उमरा सीजन का कैलेंडर जारी कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि दुनियाभर से आने वाले जायरीनों की सुविधा के लिए नई व्यवस्थाएं की गई हैं।
मक्का और मदीना में सुरक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन सेवाओं को मजबूत किया गया है। लाखों जायरीन के पहुंचने की उम्मीद है। हर साल की तरह इस बार भी हज दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल होगा।
अब पूरी दुनिया की निगाहें रविवार शाम होने वाले चांद के ऐलान पर टिकी हैं। चांद दिखने के बाद हज, अरफा और ईद उल अजहा की आधिकारिक तारीखें तय हो जाएंगी। मुस्लिम देशों में मस्जिदों, बाजारों और घरों में तैयारियां पहले से ही शुरू हो चुकी हैं।

